Sakat Chauth Vrat Katha PDF Hindi

Sakat Chauth Vrat Katha Hindi PDF Download

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Sakat Chauth Vrat Katha Hindi PDF

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माघ मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि सकट चौथ के रूप में मनाई जाती है। इसे संकष्टी चतुर्थी, वक्रतुण्डी चतुर्थी, माही चौथ और तिल कुटा चौथ भी कहा जाता है। शास्त्रों में सकट चौथ पर मिट्टी से बने गौरी, गणेश, चंद्रमा की पूजा का विधान बताया गया है। साथ ही इस दिन सकट माता की पूजा भी की जाती है। शब्द सकट का अर्थ है संकट, इस दिन गणपति ने देवताओं का संकट दूर किया था।

सकट चौथ के दिन माताएं अपनी संतान के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस दिन प्रसाद में तिल कुटा बनाने का विधान बताया गया है इसलिए इसे तिला कुटा चौथ भी कहा जाता है।

सकट चौथ व्रत कथा | Sakat Chauth Vrat Katha

इसी दिन भगवान गणेश अपने जीवन के सबसे बड़े संकट से निकलकर आए थे। इसीलिए इसे सकट चौथ कहा जाता है। एक बार मां पार्वती स्नान के लिए गईं तो उन्होंने दरबार पर गणेश को खड़ा कर दिया और किसी को अंदर नहीं आने देने के लिए कहा। जब भगवान शिव आए तो गणपति ने उन्हें अंदर आने से रोक दिया। भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने त्रिशूल से गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया। पुत्र का यह हाल देख मां पार्वती विलाप करने लगीं और अपने पुत्र को जीवित करने की हठ करने लगीं।

जब मां पार्वती ने शिव से बहुत अनुरोध किया तो भगवान गणेश को हाथी का सिर लगाकर दूसरा जीवन दिया गया और गणेश गजानन कहलाए जाने लगे। इस दिन से भगवान गणपति को प्रथम पूज्य होने का गौरव भी हासिल हुआ। सकट चौथ के दिन ही भगवान गणेश को 33 करोड़ देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। तभी से यह तिथि गणपति पूजन की तिथि बन गई। कहा जाता है कि इस दिन गणपति किसी को खाली हाथ नहीं जाने देते हैं।

सकट चौथ पूजन विधि | Sakat Chauth Pujan Vidhi

इस दिन सबसे पहले स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ्य देना है। इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। उसके बाद गणेश जी को तिलक लगाएं, दुर्वा, जल, चावल, जनेऊ अर्पित करें। फिर गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। सकट चौथ के दिन भगवान गणेश को तिल से बनी हुई चीजों का भोग जरूर लगाना है। इसके बाद धूप और दीया जलाकर भगवान गणेश के मंत्रों का जप करें। साथ ही इस दिन सकट चौथ की कथा का जाप भी करना चाहिए। इस दिन गणेशजी के 12 नामों का उच्चारण भी करना चाहिए। शाम के समय भी इसी तरह गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। चंद्रमा को अर्घ्य देते समय लोटे में तिल भी डालना है। इस दिन गाय की सेवा भी जरूर करनी चाहिए। शाम को चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करना है।

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