सकट चौथ कथा | Sakat Chauth Vrat Katha PDF Hindi

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सकट चौथ कथा | Sakat Chauth Vrat Katha Hindi PDF

हैलो दोस्तों, आज हम आपके लिए लेकर आये हैं सकट चौथ कथा | Sakat Chauth Vrat Katha PDF हिन्दी भाषा में। अगर आप सकट चौथ कथा | Sakat Chauth Vrat Katha हिन्दी पीडीएफ़ डाउनलोड करना चाहते हैं तो आप बिल्कुल सही जगह आए हैं। इस लेख में हम आपको देंगे सकट चौथ कथा | Sakat Chauth Vrat Katha के बारे में सम्पूर्ण जानकारी और पीडीएफ़ का direct डाउनलोड लिंक।

हर साल माघ मास की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ व्रत रखा जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पुत्र की लंबी उम्र और सुखी जीवन की भगवान गणेश से प्रार्थना करती हैं। ये व्रत निर्जला रखा जाता है यानी कि इसमें जल और अन्न कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता। साल में वैसे को 12 संकष्टी चतुर्थी व्रत आते हैं लेकिन सभी में माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी का खास महत्व माना गया है। ये उपवास बिना व्रत कथा को पढ़े अधूरा माना जाता है।

सकट व्रत निर्जला रखा जाता है यानी कि इसमें जल और अन्न कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता। साल में वैसे को 12 संकष्टी चतुर्थी व्रत आते हैं लेकिन सभी में माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी का खास महत्व माना गया है। ये उपवास बिना व्रत कथा को पढ़े अधूरा माना जाता है।

Sakat Chauth/सकट चौथ व्रत शुभ मुहूर्त-

सकट चौथ व्रत तिथि- जनवरी 21, 2021 (शुक्रवार)
सकट चौथ के दिन चन्द्रोदय समय – 20:40
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – जनवरी 21, 2021 को 08 बजकर 51 मिनट
चतुर्थी तिथि समाप्त – 22 जनवरी 2022, शनिवार को 09:41 AM।

सकट चौथ कथा | Sakat Chauth Katha in Hindi

एक समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के विवाह की तैयारियां चल रही थीं, इसमें सभी देवताओं को निमंत्रित किया गया लेकिन विघ्नहर्ता गणेश जी को निमंत्रण नहीं भेजा गया। सभी देवता अपनी पत्नियों के साथ विवाह में आए लेकिन गणेश जी उपस्थित नहीं थे, ऐसा देखकर देवताओं ने भगवान विष्णु से इसका कारण पूछा।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव और पार्वती को निमंत्रण भेजा है, गणेश अपने माता-पिता के साथ आना चाहें तो आ सकते हैं। हालांकि उनको सवा मन मूंग, सवा मन चावल, सवा मन घी और सवा मन लड्डू का भोजन दिनभर में चाहिए। यदि वे नहीं आएं तो अच्छा है। दूसरे के घर जाकर इतना सारा खाना-पीना अच्छा भी नहीं लगता। इस दौरान किसी देवता ने कहा कि गणेश जी अगर आएं तो उनको घर के देखरेख की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

उनसे कहा जा सकता है कि आप चूहे पर धीरे-धीरे जाएंगे तो बाराज आगे चली जाएगी और आप पीछे रह जाएंगे, ऐसे में आप घर की देखरेख करें। योजना के अनुसार, विष्णु जी के निमंत्रण पर गणेश जी वहां उपस्थित हो गए। उनको घर के देखरेख की जिम्मेदारी दे दी गई। बारात घर से निकल गई और गणेश जी दरवाजे पर ही बैठे थे, यह देखकर नारद जी ने इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि विष्णु भगवान ने उनका अपमान किया है। तब नारद जी ने गणेश जी को एक सुझाव दिया।

गणपति ने सुझाव के तहत अपने चूहों की सेना बारात के आगे भेज दी, जिसने पूरे रास्ते खोद दिए। इसके फलस्वरूप देवताओं के रथों के पहिए रास्तों में ही फंस गए। बारात आगे नहीं जा पा रही थी। किसी के समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए, तब नारद जी ने गणेश जी को बुलाने का उपाय दिया ताकि देवताओं के विघ्न दूर हो जाएं। भगवान शिव के आदेश पर नंदी गजानन को लेकर आए। देवताओं ने गणेश जी का पूजन किया, तब जाकर रथ के पहिए गड्ढों से निकल तो गए लेकिन कई पहिए टूट गए थे। उस समय पास में ही एक लोहार काम कर रहा था, उसे बुलाया गया। उसने अपना काम शुरू करने से पहले गणेश जी का मन ही मन स्मरण किया और देखते ही देखते सभी रथों के पहियों को ठीक कर दिया।

उसने देवताओं से कहा कि लगता है आप सभी ने शुभ कार्य प्रारंभ करने से पहले विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा नहीं की है, तभी ऐसा संकट आया है। आप सब गणेश जी का ध्यान कर आगे जाएं, आपके सारे काम हो जाएंगे।देवताओं ने गणेश जी की जय जयकार की और बारात अपने गंतव्य तक सकुशल पहुंच गई। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विवाह संपन्न हो गया।

Sakat Chauth/सकट चौथ व्रत पूजा विधि-

1. सुबह स्नान ध्यान करके भगवान गणेश की पूजा करें।
2. इसके बाद सूर्यास्त के बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
3. गणेश जी की मूर्ति के पास एक कलश में जल भर कर रखें।
4. धूप-दीप, नैवेद्य, तिल, लड्डू, शकरकंद, अमरूद, गुड़ और घी अर्पित करें।
5. तिलकूट का बकरा भी कहीं-कहीं बनाया जाता है।
6. पूजन के बाद तिल से बने बकरे की गर्दन घर का कोई सदस्य काटता है।

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Added on 20 Jan, 2022 by pk

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