श्रावण/सावन सोमवार | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam PDF Hindi

श्रावण/सावन सोमवार | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam Hindi PDF Download

श्रावण/सावन सोमवार | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam in Hindi PDF download link is available below in the article, download PDF of श्रावण/सावन सोमवार | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam in Hindi using the direct link given at the bottom of content.

38 People Like This
REPORT THIS PDF ⚐

सावन सोमवार की व्रत कथा | Sawan Somvar Vrat katha Hindi PDF

श्रावण/सावन सोमवार | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam हिन्दी PDF डाउनलोड करें इस लेख में नीचे दिए गए लिंक से। अगर आप श्रावण/सावन सोमवार | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam हिन्दी पीडीएफ़ डाउनलोड करना चाहते हैं तो आप बिल्कुल सही जगह आए हैं। इस लेख में हम आपको रहे हैं श्रावण/सावन सोमवार | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam के बारे में सम्पूर्ण जानकारी और पीडीएफ़ का direct डाउनलोड लिंक।

सोमवार का व्रत श्रावण, चैत्र, वैसाख, कार्तिक और माघ महीने के शुक्ल पक्ष के पहले सोमवार से शुरू किया जाता है कहते हैं इस व्रत को 16 सोमवार तक श्रद्धापूर्वक करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति की यथाशीघ्र शादी हो जाती है। इस व्रत को शुरू करने के लिए सावन का महीना सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा आप मार्गश्रीष यानी अगहन महीने में भी इसे शुरू कर सकते हैं। कुछ पंडित चैत्र और अगहन में इस व्रत को करने की सलाह देते हैं।

सावन 2022 माह का महत्व

सावन माह का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस माह में शिव की पूजा से भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं। इस माह में सोमवार के व्रत से शीघ्र फल प्राप्त होता है। इस माह में शिव की पूजा से विवाह में आने वाली दिक्कतें दूर हो जाती हैं। सावन में शिव पूजा से सभी तरह के दुख की समाप्ति होती है। शिव पूजा से हमारे समस्त पाप का नाश होता है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सावन सोमवार व्रत कथा हिन्दी में | Sawam Somvar Vrat Katha in Hindi PDF

एक शहर में एक साहूकार रहता था। उसके घर में पैसों की कोई कमी नहीं थी लेकिन उसके कोई संतान नहीं थी, जिससे वह बहुत दुखी रहता था। पुत्र की कामना करते हुए वह हर सोमवार को भगवान शिव का व्रत किया करते थे और शिव और पार्वती जी की पूरी भक्ति के साथ शिवालय में पूजा करते थे। उनकी भक्ति देखकर माता पार्वती प्रसन्न हुई और उन्होंने भगवान शिव से साहूकार की इच्छा पूरी करने का अनुरोध किया। पार्वती जी की इच्छा सुनकर भगवान शिव ने कहा कि “हे पार्वती। इस संसार में प्रत्येक प्राणी को उसके कर्मों के अनुसार फल मिलता है और उसके भाग्य में जो कुछ भी होता है उसे भुगतना पड़ता है।” लेकिन पार्वती जी ने साहूकार की आस्था को बनाए रखने की इच्छा पूरी करने की इच्छा व्यक्त की। माता पार्वती के अनुरोध पर शिवजी ने साहूकार को वरदान दिया लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उनकी संतान अल्पायु होगी और केवल सोलह वर्ष तक ही जीवित रहेगी।

साहूकार माता पार्वती और भगवान शिव की यह बातचीत सुन रहा था। वह पहले की तरह शिव की पूजा करता रहा। कुछ समय बाद साहूकार के एक पुत्र का जन्म हुआ। जब वह बालक ग्यारह वर्ष का हुआ तो उसे पढ़ने के लिए काशी भेज दिया गया। साहूकार ने बेटे के मामा को बुलाकर ढेर सारा पैसा दिया और कहा कि तुम इस बच्चे को काशी विद्या प्राप्त करने के लिए ले जाओ और रास्ते में यज्ञ करो। आप जहां भी यज्ञ करें, वहां ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा देकर जाएं।

मामा-भांजे  दोनों एक ही तरह से यज्ञ करते थे और ब्राह्मणों को दक्षिणा दान करते थे और काशी की ओर चले जाते थे। राठे में एक नगर था जहाँ नगर के राजा की पुत्री का विवाह होने वाला था लेकिन जिस राजकुमार से उसका विवाह तय हुआ था वह काना था और इस बात की जानकारी राजा को नहीं थी।  राजकुमार ने इस बात का लाभ उठाकर अपने स्थान पर साहूकार के बेटे को दूल्हा बना दिया । लेकिन साहूकार का बेटा ईमानदार था। उसने अवसर का लाभ उठाया और राजकुमारी के दुपट्टे पर लिखा कि “तुम मुझसे शादी कर चुके हो लेकिन जिस राजकुमार के साथ तुम्हें भेजा जाएगा वह एक आंख वाला काना है। मैं काशी पढ़ने जा रहा हूं।”

जब राजकुमारी ने चुन्नी पर लिखे शब्दों को पढ़ा तो उसने अपने माता-पिता को यह बात बताई। बारात को छोड़कर राजा ने अपनी बेटी को नहीं छोड़ा। उधर साहूकार का लड़का और उसके मामा काशी पहुंचे और वहां जाकर यज्ञ किया। लड़के की उम्र के दिन जब वह 16 वर्ष का था, एक यज्ञ किया गया था। लड़के ने अपने मामा से कहा कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है। मामा ने कहा कि तुम अंदर जाओ और सो जाओ। शिव के वरदान के अनुसार कुछ ही पलों में बच्चे की जान निकल गई।

मृत भांजे को देख उसके मामा विलाप करने लगे। संयोग से उसी समय शिव और माता पार्वती वहां से जा रहे थे। पार्वती ने भगवान से कहा- प्राणनाथ, मैं इसकी पुकार को सहन नहीं कर सकती। आपको इस व्यक्ति की पीड़ा को दूर करना होगा। जब शिवजी मरे हुए लड़के के पास पहुंचे तो उन्होंने कहा कि यह उसी साहूकार का बेटा है, जिसे मैंने 12 साल की उम्र में वरदान दिया था। अब इसकी उम्र खत्म हो गई है। लेकिन माता पार्वती ने कहा कि हे महादेव कृपा करके इस बच्चे को और उम्र दे, नहीं तो इसके माता-पिता भी मर जाएंगे। शिव के अनुरोध पर, भगवान शिव ने लड़के को जीवित रहने का वरदान दिया। शिव की कृपा से वह बालक जीवित हो गया।

शिक्षा समाप्त करके जब वह लड़का अपने मामा के साथ अपने नगर लौट रहा था तो दोनों चलते हुए उसी नगर में पहुंचे, जहां उसका विवाह राजकुमारी के साथ हुआ था। उस नगर में भी उसने यज्ञ का आयोजन किया। उस नगर के राजा ने तुरंत उसे पहचान लिया। यज्ञ समाप्त होने पर राजा व्यापारी के बेटे और उसके मामा को महल में ले आए और उन्हें बहुत-सा धन, वस्त्र देकर राजकुमारी के साथ विदा किया।

लड़के के मामा ने नगर में पहुंचते ही एक दूत को घर भेजकर अपने आने की सूचना भेजी। बेटे के जीवित वापस लौटने की सूचना से व्यापारी बहुत प्रसन्न हुआ। व्यापारी और उसकी पत्नी ने स्वयं को एक कमरे में बंद कर रखा था। भूखे-प्यासे रहकर वो दोनों अपने बेटे की प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने प्रतिज्ञा कर रखी थी कि यदि उन्हें अपने बेटे की मृत्यु का समाचार मिला तो दोनों अपने प्राण त्याग देंगे। व्यापारी अपनी पत्नी के साथ नगर के द्वार पर पहुंचा। अपने बेटे के जीवित होने और उसके विवाह का समाचार सुनकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा।

उसी रात भगवान शिव ने व्यापारी के सपने में आकर कहा- ‘हे श्रेष्ठी! मैंने तेरे सोमवार व्रत करने और व्रतकथा सुनने से प्रसन्न होकर तेरे पुत्र को लंबी आयु प्रदान की है।’ ऐसा सुनकर व्यापारी काफी प्रसन्न हुआ।

श्रावण माह 2022 में पड़ने वाले सोमवार व्रत

18 जुलाई को पहला सावन सोमवार व्रत

25 अगस्त को दूसरा सावन सोमवार व्रत

01 अगस्त को तीसरा सावन सोमवार व्रत

12 अगस्त को चौथा सावन सोमवार व्रत

सावन सोमवार के 16 नियम और विधि

श्रावण के सबसे लोकप्रिय व्रतों में से 16 सोमवार का व्रत है। अविवाहिताएं इस व्रत से मनचाहा वर पा सकती हैं। वैसे यह ब्रत हर उम्र और हर वर्ग के व्यक्ति कर सकते हैं लेकिन नियम की पाबंदी के चलते वही लोग इसे करें जो क्षमता रखते हैं। विवाहित इसेे करने से पहले ब्रह्मचर्य नियमों का ध्यान रखें। व्रत के विशेष नियम है।

  • सूर्योदय से पहले उठकर पानी में कुछ काले तिल डालकर नहाना चाहिए।
  • इस दिन सूर्य को हल्दी मिश्रित जल अवश्य चढ़ाएं।
  • अब भगवान शिव की उपासना करें। सबसे पहले तांबे के पात्र में शिवलिंग रखें।
  • भगवान शिव का अभिषेक जल या गंगाजल से होता है, परंतु विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दूध, दही, घी, शहद, चने की दाल, सरसों तेल, काले तिल, आदि कई सामग्रियों से अभिषेक की विधि प्रचलित है।
  • इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र के द्वारा श्वेत फूल, सफेद चंदन, चावल, पंचामृत, सुपारी, फल और गंगाजल या स्वच्छ पानी से भगवान शिव और पार्वती का पूजन करना चाहिए।
  • अभिषेक के दौरान पूजन विधि के साथ-साथ मंत्रों का जाप भी बेहद आवश्यक माना गया है। महामृत्युंजय मंत्र, भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र या अन्य मंत्र, स्तोत्र जो कंठस्थ हो।
  • शिव-पार्वती की पूजा के बाद सोमवार की व्रत कथा करें।
  • आरती करने के बाद भोग लगाएं और घर परिवार में बांटने के बाद स्वयं ग्रहण करें।
  • नमक रहित प्रसाद ग्रहण करें।
  • दिन में शयन न करें।
  • प्रति सोमवार पूजन का समय निश्चित रखें।
  • प्रति सोमवार एक ही समय एक ही प्रसाद ग्रहण करें।
  • प्रसाद में गंगाजल, तुलसी, लौंग, चूरमा, खीर और लड्डू में से अपनी क्षमतानुसार किसी एक का चयन करें।
  • 16 सोमवार तक जो खाद्य सामग्री ग्रहण करें उसे एक स्थान पर बैठकर ग्रहण करें, चलते फिरते नहीं।
  • प्रति सोमवार एक विवाहित जोड़े को उपहार दें। (फल, वस्त्र या मिठाई)
  • 16 सोमवार तक प्रसाद और पूजन के जो नियम और समय निर्धारित करें उसे खंडित ना होने दें।

सावन मास | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam PDF Download using the link given below.

Also Check
16 Somvar Vrat Katha in English PDF
16 Somvar Vrat Katha PDF in Hindi

श्रावण/सावन सोमवार | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam PDF - 2nd Page
श्रावण/सावन सोमवार | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam PDF - PAGE 2
PDF's Related to श्रावण/सावन सोमवार | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam

श्रावण/सावन सोमवार | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam PDF Download Link

2 PDF(s) attached to श्रावण/सावन सोमवार | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam

श्रावण/सावन सोमवार व्रत कथा | Sawan Somvar Vrat Katha in Hindi PDF

श्रावण/सावन सोमवार व्रत कथा | Sawan Somvar Vrat Katha in Hindi PDF

Size: 0.62 | Pages: 2 | Source(s)/Credits: Multiple Sources | Language: Hindi

श्रावण/सावन सोमवार व्रत कथा | Sawan Somvar Vrat Katha in Hindi PDF Download using the link given.

Added on 26 Jul, 2021 by pk
सोमवार व्रत पूजा विधि नियम PDF

सोमवार व्रत पूजा विधि नियम PDF

Size: 0.04 | Pages: 2 | Source(s)/Credits: Multiple Sources | Language: Hindi

सोलह सोमवार व्रत पूजा विधि नियम PDF using the link given

Added on 25 Jul, 2021 by pk

REPORT THISIf the purchase / download link of श्रावण/सावन सोमवार | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam PDF is not working or you feel any other problem with it, please REPORT IT by selecting the appropriate action such as copyright material / promotion content / link is broken etc. If श्रावण/सावन सोमवार | Sawan Somvar Vrat Katha Pooja Vidhi & Niyam is a copyright material we will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *