कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha PDF Hindi

कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha Hindi PDF Download

कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha in Hindi PDF download link is available below in the article, download PDF of कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha in Hindi using the direct link given at the bottom of content.

39 People Like This
REPORT THIS PDF ⚐

कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha Hindi PDF

हैलो दोस्तों, आज हम आपके लिए लेकर आये हैं कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha PDF हिन्दी भाषा में। अगर आप कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha हिन्दी पीडीएफ़ डाउनलोड करना चाहते हैं तो आप बिल्कुल सही जगह आए हैं। इस लेख में हम आपको देंगे कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha के बारे में सम्पूर्ण जानकारी और पीडीएफ़ का direct डाउनलोड लिंक।

हिंदू पंचांग अनुसार हर वर्ष का आठवां महीना कार्तिक होता है। कार्तिक का महीना बारह महीनों में से श्रेष्ठ महीना है। पुराणों में कार्तिक मास को स्नान, व्रत व तप की दृष्टि से मोक्ष ओए कल्याण प्रदान करने वाला बताया गया है। कार्तिक मास में पूरे माह स्नान, दान, दीप दान, तुलसी विवाह, कार्तिक कथा का माहात्म्य आदि सुनते हैं। ऎसा करने से अत्यत शुभ फलों की प्राप्ति व पापों का नाश होता है ( Kartik Maas Vrat Ka Mahatva ) । पुराणों अनुसार जो व्यक्ति इस कार्तिक माह में स्नान, दान तथा व्रत करता है तो उसके सारे पापों का अंत हो जाता है।

श्री कृष्ण जी तो यंहा तक कहा है की कार्तिक का यह महीना भगवान श्रीकृष्ण को अति प्रिय है। इस महीने में किया गया थोड़ा सा भजन भी बहुत ज्यादा फल देता है। भगवान श्री हरि विष्णु ने स्वयं कहा है कि:- ‘कार्तिक माह मुझे अत्यधिक प्रिय है। वनस्पतियों में तुलसी, तिथियों में एकादशी और क्षेत्रों में श्री कार्तिक भी मुझे प्रिय हैं। जो प्राणी जितेन्द्रिय होकर इनका सेवन करता है, वह यज्ञ करने वाले मनुष्य से भी अधिक प्रिय लगता है, उसके समस्त पाप दूर हो जाते हैं।’ ऎसा करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है. कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि पर व्यक्ति को बिना स्नान किए नहीं रहना चाहिए।

कार्तिक मास व्रत कथा इन हिन्दी

किसी गाँव में एक बुढ़िया रहती थी और वह कार्तिक का व्रत रखा करती थी। उसके व्रत खोलने के समय कृष्ण भगवान आते और एक कटोरा खिचड़ी का रखकर चले जाते। बुढ़िया के पड़ोस में एक औरत रहती थी। वह हर रोज यह देखकर ईर्ष्या करती कि इसका कोई नहीं है फिर भी इसे खाने के लिए खिचड़ी मिल ही जाती है। एक दिन कार्तिक महीने का स्नान करने बुढ़िया गंगा गई. पीछे से कृष्ण भगवान उसका खिचड़ी का कटोरा रख गए। पड़ोसन ने जब खिचड़ी का कटोरा रखा देखा और देखा कि बुढ़िया नही है तब वह कटोरा उठाकर घर के पिछवाड़े फेंक आई।

कार्तिक स्नान के बाद बुढ़िया घर आई तो उसे खिचड़ी का कटोरा नहीं मिला और वह भूखी ही रह गई। बार-बार एक ही बात कहती कि कहां गई मेरी खिचड़ी और कहां गया मेरा खिचड़ी का कटोरा। दूसरी ओर पड़ोसन ने जहाँ खिचड़ी गिराई थी वहाँ एक पौधा उगा जिसमें दो फूल खिले. एक बार राजा उस ओर से निकला तो उसकी नजर उन दोनो फूलों पर पड़ी और वह उन्हें तोड़कर घर ले आया। घर आने पर उसने वह फूल रानी को दिए जिन्हें सूँघने पर रानी गर्भवती हो गई. कुछ समय बाद रानी ने दो पुत्रों को जन्म दिया। वह दोनो जब बड़े हो गए तब वह किसी से भी बोलते नही थे लेकिन जब वह दोनो शिकार पर जाते तब रास्ते में उन्हें वही बुढ़िया मिलती जो अभी भी यही कहती कि कहाँ गई मेरी खिचड़ी और कहाँ गया मेरा कटोरा। बुढ़िया की बात सुनकर वह दोनो कहते कि हम है तेरी खिचड़ी और हम है तेरा बेला

हर बार जब भी वह शिकार पर जाते तो बुढ़िया यही बात कहती और वह दोनो वही उत्तर देते। एक बार राजा के कानों में यह बात पड़ गई। उसे आश्चर्य हुआ कि दोनो लड़के किसी से नहीं बोलते तब यह बुढ़िया से कैसे बात करते हैं। राजा ने बुढ़िया को राजमहल बुलवाया और कहा कि हम से तो किसी से ये दोनों बोलते नहीं है, तुमसे यह कैसे बोलते है?  बुढ़िया ने कहा कि महाराज मुझे नहीं पता कि ये कैसे मुझसे बोल लेते हैं। मैं तो कार्तिक का व्रत करती थी और कृष्ण भगवान मुझे खिचड़ी का बेला भरकर दे जाते थे। एक दिन मैं स्नान कर के वापिस आई तो मुझे वह खिचड़ी नहीं मिली। जब मैं कहने लगी कि कहां गई मेरी खिचड़ी और कहाँ गया मेरा बेला? तब इन दोनो लड़को ने कहा कि तुम्हारी पड़ोसन ने तुम्हारी खिचड़ी फेंक दी थी तो उसके दो फूल बन गए थे। वह फूल राजा तोड़कर ले गया और रानी ने सूँघा तो हम दो लड़को का जन्म हुआ। हमें भगवान ने ही तुम्हारे लिए भेजा है।

कार्तिक मास व्रत के स्नान का महत्व

आध्यात्मिक ऊर्जा एवं शारीरिक शक्ति संग्रह करने में कार्तिक मासका विशेष महत्व है। इसमें सूर्य की किरणों एवं चन्द्र किरणों का पृथ्वी पर पड़ने वाला प्रभाव मनुष्य के मन मस्तिष्क को स्वस्थ रखता है। इसीलिए शास्त्रों में कार्तिक स्नान और कथा श्रवण महात्म्य पर विशेष जोर दिया गया है । धार्मिक कार्यों के लिए यह मास सर्वश्रेष्ठ माना गया है। आश्विन शुक्ल पक्ष से कार्तिक शुक्ल पक्ष तक पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान करना श्रेष्ठ माना गया है। श्रद्धालु गंगा तथा यमुना में सुबह- सवेरे स्नान करते हैं। जो लोग नदियों में स्नान नहीं कर पाते हैं, वह सुबह अपने घर में स्नान व पूजा पाठ करते हैं।

कार्तिक माह में शिव, चण्डी, सूर्य तथा अन्य देवों के मंदिरों में दीप जलाने तथा प्रकाश करने का अत्यधिक महत्व माना गया है। इस माह में भगवान विष्णु का पुष्पों से अभिनन्दन करना चाहिए। तुलसी पूजा का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि तुलसी के पत्ते पंचामृत में डालने पर चरणामृत बन जाता है। तुलसी में अनन्त औषधीय गुण भी विद्यमान हैं। इसीलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने इन्हें विष्णु प्रिया कहकर पूजनीय माना। देवशयनी एकादशी से देवोत्थान एकादशी तक छः माह तुलसी की विशेष पूजा होती है। कार्तिक में तो इनका अत्याधिक महत्व बढ़ जाता है। इस मास में आप जितना दान, तप, व्रत रखेगा। आपके ऊपर उतना ही श्री हरि विष्णु की कृपा जरूर होगी ( Kartik Maas Vrat Ke Snan Ka Mahatva ) । वह परम कृपा का भागीदार होगा ।

कार्तिक माह की षष्ठी को कार्तिकेय व्रत का अनुष्ठान किया जाता है स्वामी कार्तिकेय इसके देवता हैं। इस दिन अपनी क्षमतानुसार दान भी करना चाहिए। यह दान किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को दिया जा सकता है। कार्तिक माह में पुष्कर, कुरुक्षेत्र तथा वाराणसी तीर्थ स्थान स्नान तथा दान के लिए अति महत्वपूर्ण माने गए हैं।

कार्तिक माह में की गई पूजा व् उपवास तीर्थ यात्रा के बराबर शुभ फल जितना होता है ( Kartik Maas Vrat Ka Mahatva ) ! कार्तिक माह के महत्व के बारे में स्कन्द पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण आदि प्राचीन ग्रंथों में देखने को मिलता है। कार्तिक माह में किए गये स्नान का फल, एक सहस्र बार किए गंगा स्नान के समान, सौ बार माघ स्नान के समान है। माना जाता है की जो फल कुम्भ व् प्रयाग में स्नान करने पर मिलता है, उतना फल कार्तिक माह में किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से मिलता है। इस माह में अधिक से अधिक जप करना चाहिए । और भोजन दिन में एक समय ही करना चाहिए। जो व्यक्ति कार्तिक के पवित्र माह के नियमों का पालन करते हैं, वह वर्ष भर के सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।

कार्तिक मास में दीपदान

इस दिन पवित्र नदियों में, मंदिरों में दीप दान किया जाता हैं। साथ ही आकाश में भी दीप छोड़े जाते हैं। यह कार्य शरद पूर्णिमा से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता हैं। दीप दान के पीछे का सार यह हैं कि इससे घर में धन आता हैं। कार्तिक में लक्ष्मी जी के लिए दीप जलाया जाता हैं और संकेत दिया जाता हैं अब जीवन में अंधकार दूर होकर प्रकाश देने की कृपा करें। कार्तिक में घर के मंदिर, वृंदावन, नदी के तट एवम शयन कक्ष में दीपक प्रज्वलित करने का बहुत अधिक महत्व होता है।

You can download the कार्तिक मास कथा PDF format using the link given below.

कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha PDF - 2nd Page
कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha PDF - PAGE 2
PDF's Related to कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha

कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha PDF Download Link

REPORT THISIf the purchase / download link of कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha PDF is not working or you feel any other problem with it, please REPORT IT by selecting the appropriate action such as copyright material / promotion content / link is broken etc. If कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha is a copyright material we will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

RELATED PDF FILES

Leave a Reply

Your email address will not be published.