Do Bailon ki Katha by Munshi Premchand PDF HIndi

Do Bailon ki Katha by Munshi Premchand HIndi PDF Download

Do Bailon ki Katha by Munshi Premchand in HIndi PDF download link is available below in the article, download PDF of Do Bailon ki Katha by Munshi Premchand in HIndi using the direct link given at the bottom of content.

83 People Like This
REPORT THIS PDF ⚐

Do Bailon ki Katha by Munshi Premchand HIndi PDF

Do Bailon ki Katha by Munshi Premchand PDF Download in HIndi for free using the direct download link given at the bottom of this article.

दो बैलों की कथा – जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुद्धिमान समझा जाता है. हम जब किसी आदमी को पहले दर्जे का बेवकूफ कहना चाहते हैं, तो उसे गधा कहते हैं. गधा सचमुच बेवकूफ है या उसके सीधेपन, उसकी निरापद सहिष्णुता ने उसे यह पदवी दे दी है, इसका निश्चय नहीं किया जा सकता. गायें सींग मारती हैं, ब्याही हुई गाय तो अनायास ही सिंहनी का रूप धारण कर लेती है. कुत्ता भी बहुत गरीब जानवर है, लेकिन कभी-कभी उसे भी क्रोध आ ही जाता है, किन्तु गधे को कभी क्रोध करते नहीं सुना, न देखा. जितना चाहो गरीब को मारो, चाहे जैसी खराब, सड़ी हुई घास सामने डाल दो, उसके चेहरे पर कभी असंतोष की छाया भी नहीं दिखाई देगी. वैशाख में चाहे एकाध बार कुलेल कर लेता है, पर हमने तो उसे कभी खुश होते नहीं देखा. उसके चेहरे पर स्थाई विषाद स्थायी रूप से छाया रहता है. सुख-दुःख, हानि-लाभ किसी भी दशा में उसे बदलते नहीं देखा. ऋषियों-मुनियों के जितने गुण हैं, वे सभी उसमें पराकाष्ठा को पहुँच गए हैं, पर आदमी उसे बेवकूफ कहता है. सद्गुणों का इतना अनादर!

पूरी कहानी को जानने और समझने के लिए आप नीचे दिये गए डाउनलोड का बटन पर क्लिक कर सकते हैं।

Do Bailon ki Katha by Munshi Premchand PDF - 2nd Page
Do Bailon ki Katha by Munshi Premchand PDF - PAGE 2
PDF's Related to Do Bailon ki Katha by Munshi Premchand

Do Bailon ki Katha by Munshi Premchand PDF Download Link

REPORT THISIf the purchase / download link of Do Bailon ki Katha by Munshi Premchand PDF is not working or you feel any other problem with it, please REPORT IT by selecting the appropriate action such as copyright material / promotion content / link is broken etc. If Do Bailon ki Katha by Munshi Premchand is a copyright material we will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

2 thoughts on “Do Bailon ki Katha by Munshi Premchand

Leave a Reply

Your email address will not be published.