महाशिवरात्रि व्रत कथा | Maha Shivratri Vrat Katha, Aarti & Puja Vidhi PDF in Hindi

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महाशिवरात्रि व्रत कथा | Maha Shivratri Vrat Katha, Aarti & Puja Vidhi

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महाशिवरात्रि व्रत कथा | Maha Shivratri Vrat Katha, Aarti & Puja Vidhi Hindi

कहा जाता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करना सबसे आसान है। जो भक्त सच्चे मन से इनकी अराधना करता है उस पर कभी कोई संकट नहीं आता है। महाशिवरात्रि का दिन शिव अराधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। फाल्गुन मास में आने वाली महाशिवरात्रि इस बार 11 मार्च के दिन पड़ी है। जानिए इस खास पर्व की पूजा विधि, सामग्री, मंत्र और सभी जानकार

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सामग्री लिस्ट: बेलपत्र, भांग, धतूरा, गाय का शुद्ध कच्चा दूध, चंदन, रोली, केसर, भस्म, कपूर, दही, मौली यानी कलावा, अक्षत् (साबुत चावल), शहद, मिश्री, धूप, दीप, साबुत हल्दी, नागकेसर, पांच प्रकार के फल, गंगा जल, वस्त्र, जनेऊ, इत्र, कुमकुम, पुष्पमाला, शमी का पत्र, खस, लौंग, सुपारी, पान, रत्न-आभूषण, इलायची, फूल, आसन, पार्वती जी के श्रंगार की सामग्री, पूजा के बर्तन और दक्षिणा। इन सब चाजों का प्रबंध एक दिन पहले ही कर लें।

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पूजा विधि: पूजा करने से पहले अपने माथे पर त्रिपुंड लगाएं। इसके लिए चंदन या विभूत तीन उंगलियों पर लगाकर माथे के बायीं तरफ से दायीं तरफ की तरफ त्रिपुंड लगाएं। शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। आप चाहे तो खाली जल से भी शिव का अभिषेक कर सकते हैं। अभिषेक करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का जप करते रहना चाहिए। शिव को बेलपत्र, आक-धतूरे का फूल, चावल, भांग, इत्र जरूर चढ़ाएं। चंदन का तिलक लगाएं। धूप दीपक जलाएं। शिव के मंत्रों का जाप करें। शिव चालीसा पढ़ें। खीर और फलों का भोग लगाएं। शिव आरती उतारें। संभव हो तो रात्रि भर जागरण करें। घर के पास शिव मंदिर नहीं है तो आप घर पर ही मिट्टी के शिवलिंग बनाकर उनका पूजन कर सकते हैं।

पूजा मुहूर्त: महाशिवरात्रि पूजा के लिए निशीथ काल मुहूर्त सबसे शुभ माना गया है। वैसे भक्त रात्रि के चारों प्रहर में से किसी भी प्रहर में शिव पूजा कर सकते हैं।
निशिता काल पूजा समय – 12:06 AM से 12:55 AM, मार्च 12
अवधि – 00 घण्टे 48 मिनट्स
शिवरात्रि पारण समय – 06:34 AM से 03:02 PM
प्रथम प्रहर पूजा समय – 06:27 PM से 09:29 PM
द्वितीय प्रहर पूजा समय – 09:29 PM से 12:31 PM, मार्च 12
तृतीय प्रहर पूजा समय – 12:31 PM से 03:32 PM, मार्च 12
चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 03:32 PM से 06:34 PM, मार्च 12

मंत्र: ऊं त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।।

Mahashivratri Vrat Katha 2021

महाशिवरात्रि’ के विषय में भिन्न – भिन्न मत हैं, कुछ विद्वानों का मत है कि आज के ही दिन शिवजी और माता पार्वती विवाह-सूत्र में बंधे थे जबकि अन्य कुछ विद्वान् ऐसा मानते हैं कि आज के ही दिन शिवजी ने ‘कालकूट’ नाम का विष पिया था जो सागरमंथन के समय समुद्र से निकला था। ज्ञात है कि यह समुद्रमंथन देवताओं और असुरों ने अमृत-प्राप्ति के लिए किया था। एक शिकारी की कथा भी इस त्यौहार के साथ जुड़ी हुई है कि कैसे उसके अनजाने में की गई पूजा से प्रसन्न होकर भगवान् शिव ने उस पर अपनी असीम कृपा की थी। यह कथा पौराणिक “शिव पुराण” में भी संकलित है …

प्राचीन काल में, किसी जंगल में एक गुरुद्रुह नाम का एक शिकारी रहता था जो जंगली जानवरों का शिकार करता तथा अपने परिवार का भरण-पोषण किया करता था। एक बार शिव-रात्रि के दिन जब वह शिकार के लिए निकला, पर संयोगवश पूरे दिन खोजने के बाद भी उसे कोई शिकार न मिला, उसके बच्चों, पत्नी एवं माता-पिता को भूखा रहना पड़ेगा इस बात से वह चिंतित हो गया, सूर्यास्त होने पर वह एक जलाशय के समीप गया और वहां एक घाट के किनारे एक पेड़ पर थोड़ा सा जल पीने के लिए लेकर, चढ़ गया क्योंकि उसे पूरी उम्मीद थी कि कोई न कोई जानवर अपनी प्यास बुझाने के लिए यहाँ ज़रूर आयेगा। वह पेड़ ‘बेल-पत्र’ का था और उसी पेड़ के नीचे शिवलिंग भी था जो सूखे बेलपत्रों से ढके होने के कारण दिखाई नहीं दे रहा था।

पूरी कथा पढ़ने के लिए आप पीडीएफ़ डाउनलोड कर सकते हैं। Download महाशिवरात्रि व्रत कथा | Maha Shivratri Vrat Katha, Aarti & Puja Vidhi PDF or read online for free through direct link provided below.

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