आंवला नवमी व्रत कथा | Amla Navami Vrat Katha PDF in Hindi

आंवला नवमी व्रत कथा | Amla Navami Vrat Katha Hindi PDF Download

आंवला नवमी व्रत कथा | Amla Navami Vrat Katha in Hindi PDF download link is available below in the article, download PDF of आंवला नवमी व्रत कथा | Amla Navami Vrat Katha in Hindi using the direct link given at the bottom of content.

3 People Like This
REPORT THIS PDF ⚐

आंवला नवमी व्रत कथा | Amla Navami Vrat Katha PDF Download in Hindi for free using the direct download link given at the bottom of this article.

आंवला नवमी व्रत कथा | Amla Navami Vrat Katha Hindi

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी (Amla Navami 2021) या अक्षय नवमी के नाम से भी जाना जाता है। आंवला नवमी के दिन आंवले के वृक्ष (Amla Tree Puja) की पूजा करने का विधान है। हिन्दू धर्म के अनुसार इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल अक्षय रहता है और इसी दिन श्री कृष्ण ने कंस के विरुद्ध वृंदावन में घूमकर जनमत तैयार किया था।

मान्यता है कि इस दिन दान आदि करने से पुण्य का फल इस जन्म में तो मिलता ही है, अगले जन्म में भी मिलता है।  शास्त्रों के अनुसार इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है।  कहते हैं कि इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करते समय परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना करनी चाहिए।

आंवला नवमी व्रत कथा | Amla Navami Vrat Katha PDF - 2nd Page
Page No. 2 of आंवला नवमी व्रत कथा | Amla Navami Vrat Katha PDF

आंवला नवमी की पूजा विधि | Amla Navami Puja Vidhi

  • अक्षय नवमी के दिन आंवला वृक्ष की पूजा की जाती है।
  • वृक्ष की हल्दी कुमकुम आदि से पूजा करके उसमें जल और कच्चा दूध अर्पित करें।
  • इसके बाद आंवले के पेड़ की परिक्रमा करते हुए तने में कच्चा सूत या मौली आठ बार लपेटी जाती है।
  • पूजा के बाद इसकी कथा पढ़ी और सुनी जाती है।
  • पूजा खत्म होने के बाद परिवार और मित्रों आदि के साथ वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन किए जाने का महत्व है।

अक्षय (आंवला) नवमी की व्रत कथा | Akshay Navami Ki Kahani

अक्षय नवमी के संबंध में कथा है कि दक्षिण में स्थित विष्णुकांची राज्य के राजा जयसेन के इकलौते पुत्र का नाम मुकुंद देव था। एक बार राजकुमार मुकुंद देव जंगल में शिकार खेलने गए। तभी उनकी नजर व्यापारी कनकाधिप की पुत्री किशोरी के अतीव सौंदर्य पर पड़ी। वे उस पर मोहित हो गए। मुकुंद देव ने उससे विवाह करने की इच्छा प्रकट की।

इस पर किशोरी ने कहा कि मेरे भाग्य में पति का सुख लिखा ही नहीं है। राज ज्योतिषी ने कहा है कि मेरे विवाह मंडप में बिजली गिरने से मेरे वर की तत्काल मृत्यु हो जाएगी। परंतु मुकुंद देव अपने प्रस्ताव पर अडिग थे। उन्होंने अपने आराध्य देव सूर्य और किशोरी ने अपने आराध्य भगवान शंकर की आराधना की। भगवान शंकर ने किशोरी से भी सूर्य की आराधना करने को कहा।

किशोरी गंगा तट पर सूर्य आराधना करने लगी। तभी विलोपी नामक दैत्य किशोरी पर झपटा तो सूर्य देव ने उसे तत्काल भस्म कर दिया। सूर्य देव ने किशोरी से कहा कि तुम कार्तिक शुक्ल नवमी को आंवले के वृक्ष के नीचे विवाह मंडप बनाकर मुकुंद देव से विवाह कर लो।

दोनों ने मिलकर मंडप बनाया। अकस्मात बादल घिर आए और बिजली चमकने लगी। भांवरें पड़ गईं, तो आकाश से बिजली मंडप की ओर गिरने लगी, लेकिन आंवले के वृक्ष ने उसे रोक लिया। इस कहानी के कारण आंवले के वृक्ष की पूजा होने लगी। हालांकि आंवले का वृक्ष औषधीय गुणों से परिपूर्ण होता है। आयुर्वेद में इसके अनेक गुण बताए गए हैं। इसलिए इसकी पूजा का तात्पर्य औषधीय वनस्पतियों का संरक्षण व प्रकृति का सम्मान करना भी है।

आप नीचे दिए लिंक का उपयोग करके आंवला नवमी व्रत कथा | Amla Navami Vrat Katha PDF में डाउनलोड कर सकते हैं।

PDF's Related to आंवला नवमी व्रत कथा | Amla Navami Vrat Katha

आंवला नवमी व्रत कथा | Amla Navami Vrat Katha PDF Download Link

REPORT THISIf the download link of आंवला नवमी व्रत कथा | Amla Navami Vrat Katha PDF is not working or you feel any other problem with it, please REPORT IT by selecting the appropriate action such as copyright material / promotion content / link is broken etc. If आंवला नवमी व्रत कथा | Amla Navami Vrat Katha is a copyright material we will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

RELATED PDF FILES

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *