श्री दुर्गासप्तशती पाठ (Durga Saptashati Path) Hindi

श्री दुर्गासप्तशती पाठ (Durga Saptashati Path) Hindi PDF Download

Download PDF of श्री दुर्गासप्तशती पाठ (Durga Saptashati Path) in Hindi from the link available below in the article, Hindi श्री दुर्गासप्तशती पाठ (Durga Saptashati Path) PDF free or read online using the direct link given at the bottom of content.

176 Like this PDF
REPORT THIS PDF ⚐

Durga Saptashati - श्री दुर्गासप्तशती पाठ Hindi

श्री दुर्गासप्तशती पाठ (Durga Saptashati Path) हिन्दी PDF डाउनलोड करें इस लेख में नीचे दिए गए लिंक से। अगर आप Durga Saptashati - श्री दुर्गासप्तशती पाठ हिन्दी पीडीएफ़ डाउनलोड करना चाहते हैं तो आप बिल्कुल सही जगह आए हैं। इस लेख में हम आपको दे रहे हैं श्री दुर्गासप्तशती पाठ (Durga Saptashati Path) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी और पीडीएफ़ का direct डाउनलोड लिंक।

श्री दुर्गासप्तशती पाठ सात सौ श्लोकों को एकत्रित करके बनाया गया एक देवी उपासना ग्रंथ है जिसका पाठ करने से सभी प्रकार दुख दर्द और जीवन की परेशानियाँ दूर होती हैं। नवरात्रि की कालावधि में देवी पूजन के साथ उपासना स्वरूप देवी के स्तोत्र, सहस्रनाम, देवी माहात्म्य इत्यादि के यथाशक्ति पाठ और पाठ समाप्ति के दिन विशेष रूप से हवन करते हैं। श्री दुर्गाजीका एक नाम ‘चंडी’ भी है।

श्री दुर्गासप्तशती पाठ

मार्कंडेय पुराण में इसी देवी चंडी का माहात्म्य बताया है। उसमें देवी के विविध रूपों एवं पराक्रमों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसमें से सात सौ श्लोक एकत्रित कर देवी उपासना के लिए ‘श्री दुर्गासप्तशती’ नामक ग्रंथ बनाया गया है। सुख, लाभ, जय इत्यादि कामनाओं की पूर्ति के लिए सप्तशती पाठ करने का महत्त्व बताया गया है।

शारदीय नवरात्रि में श्री दुर्गासप्तशती पाठ विशेष रूप से करते हैं। कुछ घरों में पाठ करने की कुलपरंपरा ही है। पाठ करनेके उपरांत हवन भी किया जाता है । इस पूरे विधान को ‘चंडी विधान’ कहते हैं। संख्या के अनुसार नवचंडी, शतचंडी, सहस्रचंडी, लक्षचंडी ऐसे चंडी विधान बताए गए हैं। प्राय: लोग नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन एक-एक पाठ करते हैं।

नवरात्रि में यथाशक्ति श्री दुर्गासप्तशती पाठ करते हैं। पाठ के उपरांत पोथी पर फूल अर्पित करते हैं। उसके उपरांत पोथी की आरती करते हैं।

श्री दुर्गासप्तशती पाठ में देवी मां के विविध रूपों को वंदन किया गया है।

दुर्गासप्तशती पाठ करने की विधि

  • पाठ करते समय प्रथम आचमन करते हैं ।
  • तद उपरांत पोथी का पूजन करते है ।
  • अब श्री दुर्गासप्तशती का पठन करते हैं ।
  • पाठ के उपरांत पोथी पर पुष्प अर्पित करते हैं ।
  • उपरांत आरती करते हैं।

दुर्गासप्तशती पाठ करने के परिणाम

1. भाव सहित पाठ करने से व्यक्ति में भाव का वलय निर्माण होता है। ईश्वरीय तत्त्व का प्रवाह श्री दुर्गासप्तशती ग्रंथ में आकृष्ट होता है।

  • ग्रंथ में उसका वलय निर्माण होता है।
  • ईश्वरीय तत्त्व का प्रवाह पाठ करने वाले व्यक्ति की ओर आकृष्ट होता है।
  • व्यक्ति में उसका वलय निर्माण होता है।

2. संस्कृत शब्दों के कारण चैतन्य का प्रवाह श्री दुर्गासप्तशती ग्रंथ में आकृष्ट होता है।

  • ग्रंथमें चैतन्य का वलय निर्माण होता है।
  • चैतन्य के वलयों से प्रवाह का प्रक्षेपण पाठ करनेवाले की ओर होता है।
  • व्यक्ति में चैतन्य का वलय निर्माण होता है।
  • पाठ करनेवाले के मुख से वातावरण में चैतन्य के प्रवाह का प्रक्षेपण होता है।
  • चैतन्य के कण वातावरण में फैलकर दीर्घकाल तक कार्यरत रहते हैं।

4. श्री दुर्गासप्तशती ग्रंथ में मारक शक्ति का प्रवाह आकृष्ट होता है।

  • ग्रंथ में मारक शक्ति के वलय की निर्मिति होती है।
  • इस वलय द्वारा पाठ करनेवाले की ओर शक्ति के प्रवाह का प्रक्षेपण होता है।
  • व्यक्ति में मारक शक्ति का वलय का निर्माण होता है।
  • मारक शक्ति के वलय से देह में शक्ति के प्रवाहों का संचार होता है।
  • शक्ति के कण देह में फैलते हैं।
  • पाठ करते समय व्यक्ति के मुखसे वातावरण में मारक शक्ति के प्रवाह का प्रक्षेपण होता है।
  • मारक शक्ति के कण वातावरण में फैलकर अधिक समय तक कार्यरत रहते हैं।
  • यह पाठ नौ दिन करने से आदिशक्ति स्वरूप मारक शक्ति का प्रवाह व्यक्ति की ओर आता रहता है।

5. पाताल की बलशाली आसुरी शक्तियों द्वारा व्यक्ति के देह पर लाया गया काली शक्ति का आवरण तथा देह में रखी काली शक्ति नष्ट होते हैं।
6. व्यक्ति के देह के चारों ओर सुरक्षा कवच निर्माण होता है।

कवच पठन

कवच मंत्रविद्या का एक कार है। इसमें देवताओं द्वारा हमारे शरीर की रक्षा होने हेतु प्रर्थना होती है। अनेक विध मंत्रों की सहायता से मानवीय देह पर मंत्र कवचों की निर्मिति करना संभव है। ये कवच स्थूल कवच से अधिक शक्तिशाली होते हैं। स्थूल कवच बंदूक की गोली समान स्थूल आयुधों से रक्षा करते हैं तथा सूक्ष्म कवच स्थूल एवं सूक्ष्म अनिष्ट शक्तियों से रक्षा करते हैं। दुर्गाकवच, लक्ष्मीकवच, महाकालीकवच आदि के पठन से शत्रु तथा अनिष्ट शक्तियों से संरक्षण में सहायता मिलती है।

Also Check

श्री दुर्गा चालीसा (Shri Durga Chalisa) PDF
Navadurga (नवदुर्गा) Book
नवरात्रि व्रत कथा और आरती PDF
Shri Durga Saptashati Book PDF
Durga Saptashati Geeta Press Gorakhpur PDF
Durga Saptashloki PDF

श्री दुर्गासप्तशती पाठ PDF डाउनलोड करके के लिए नीचे दिए गए डाउनलोड बटन पर क्लिक करें और श्री दुर्गासप्तशती पाठ करके अपना जीवन सफल बनाएँ।

2nd Page of श्री दुर्गासप्तशती पाठ (Durga Saptashati Path) PDF
श्री दुर्गासप्तशती पाठ (Durga Saptashati Path)

Download link of PDF of श्री दुर्गासप्तशती पाठ (Durga Saptashati Path)

1 more PDF files related to श्री दुर्गासप्तशती पाठ (Durga Saptashati Path)

Durga Saptashati Book PDF

Durga Saptashati Book PDF

Size: 0.48 | Pages: 160 | Source(s)/Credits: Multiple Sources | Language: Hindi

Durga Saptashati Book PDF download using the link given below.

Added on 17 Feb, 2022 by Pradeep

REPORT THISIf the purchase / download link of श्री दुर्गासप्तशती पाठ (Durga Saptashati Path) PDF is not working or you feel any other problem with it, please REPORT IT by selecting the appropriate action such as copyright material / promotion content / link is broken etc. If this is a copyright material we will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

SIMILAR PDF FILES

  • Shri Durga Saptashati Book (श्री दुर्गासप्तशती) Hindi

    श्री दुर्गासप्तशती किताब 700 श्लोकों से बना हुआ एक महान ग्रंथ है जिसका पाठ करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। अगर आप भी सच्चे भाव से श्री दुर्गासप्तशती पाठ करेंगे तो निश्चय ही आपके सभी दुख दर्द दूर हो जाएंगे और जीवन में संपूर्णता और चैतन्य...

  • गीता प्रेस गोरखपुर दुर्गा सप्तशती | Durga Saptashati Geeta Press Gorakhpur Hindi

    Durga Saptashati Gita Press Gorakhpur Hindi PDF इसमे आपको माँ दुर्गा की आरती पीडीएफ, दुर्गा पूजा विधि, आदि चीज़े पढ़ने को मिलेंगी जिसे आप हर दिन पढ़ सकते हैं। दुर्गासप्तशती पाठ सात सौ श्लोकों को एकत्रित करके बनाया गया एक देवी उपासना ग्रंथ है जिसके रोजाना पाठ करने से माँ...

  • श्री दुर्गासप्तशती स्तोत्र (Durga Saptashati Strotam) Sanskrit

    श्री दुर्गासप्तशती स्तोत्र सात सौ श्लोकों को एकत्रित करके बनाया गया एक देवी उपासना ग्रंथ है जिसका पाठ करने से सभी प्रकार दुख दर्द और जीवन की परेशानियाँ दूर होती हैं। नवरात्रि की कालावधि में देवी पूजन के साथ उपासना स्वरूप देवी के स्तोत्र, सहस्रनाम, देवी माहात्म्य इत्यादि के यथाशक्ति...

  • सिद्ध कुंजिका स्तोत्र | Siddha Kunjika Stotram Sanskrit

    सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ परम कल्याणकारी है। इस स्तोत्र का पाठ मनुष्य के जीवन में आ रही समस्या और विघ्नों को दूर करने वाला है। मां दुर्गा के इस पाठ का जो मनुष्य विषम परिस्थितियों में वाचन करता है उसके समस्त कष्टों का अंत होता है। प्रस्तुत है श्रीरुद्रयामल...

2 thoughts on “श्री दुर्गासप्तशती पाठ (Durga Saptashati Path)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *