रामायण मनका 108 (Ramayan Manka 108) Hindi PDF

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रामायण मनका 108 (Ramayan Manka 108) - Summary

रामायण मनका 108 (Ramayan Manka 108 in Hindi) भगवान श्री राम के संपूर्ण जीवन चरित्र और रामायण के सातों काण्डों (बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड एवं उत्तरकाण्ड) का सबसे सुंदर और सरलतम संक्षेप है। इसमें कुल 108 मनके (दोहे/चौपाइयाँ) शामिल हैं, जिनका नित्य अथवा मंगलवार और शनिवार को सस्वर पाठ करने से जीवन के समस्त संकट दूर होते हैं और घर-परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।

रामायण मनका 108 का महत्व एवं महिमा

सनातन धर्म में माना जाता है कि राम नाम का जप करने मात्र से प्राणी भवसागर से पार उतर जाता है। महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री रामचरितमानस अत्यंत विस्तृत ग्रंथ हैं, जिनका प्रतिदिन संपूर्ण पाठ कर पाना सामान्य गृहस्थ के लिए कठिन होता है। ऐसी स्थिति में रामायण मनका 108 का पाठ करने से मात्र 10 से 15 मिनट में संपूर्ण रामायण के श्रवण और पाठ का पुण्य प्राप्त हो जाता है। 108 मनके जाप की एक संपूर्ण माला के समान होते हैं, जो मन को असीम शांति प्रदान करते हैं।

सम्पूर्ण रामायण मनका 108 पाठ (Ramayan Manka 108 Full Lyrics in Hindi)

॥ मंगलाचरण ॥
रघुपति राघव राजा राम। पतित पावन सीता राम॥
जय रघुनन्दन जय घनश्याम। पतित पावन सीता राम॥
भीड़ पड़ी जब भक्त पुकारे। दूर करो प्रभु दुःख हमारे॥

  1. दशरथ के घर जन्मे राम। पतित पावन सीता राम॥
  2. कौशल्या के नन्दन राम। पतित पावन सीता राम॥
  3. कैकेयी के प्यारे राम। पतित पावन सीता राम॥
  4. सुमित्रा के दुलारे राम। पतित पावन सीता राम॥
  5. चारों भाई खेलें धाम। पतित पावन सीता राम॥
  6. गुरु वशिष्ठ पढ़ावें राम। पतित पावन सीता राम॥
  7. विश्वामित्र ले आए राम। पतित पावन सीता राम॥
  8. ताड़का मारी श्री राम। पतित पावन सीता राम॥
  9. सुबाहु को संहारे राम। पतित पावन सीता राम॥
  10. मारीच भगाए श्री राम। पतित पावन सीता राम॥
  11. गौतम मुनि नारी तारी राम। पतित पावन सीता राम॥
  12. जनकपुरी में पहुँचे राम। पतित पावन सीता राम॥
  13. पुष्प वाटिका आए राम। पतित पावन सीता राम॥
  14. सिया देख हर्षित भये राम। पतित पावन सीता राम॥
  15. शिव धनुष को तोड़े राम। पतित पावन सीता राम॥
  16. परशुराम का मान हरें राम। पतित पावन सीता राम॥
  17. सिया संग ब्याहे श्री राम। पतित पावन सीता राम॥
  18. अवधपुरी में आए राम। पतित पावन सीता राम॥
  19. राजतिलक की तैयारी राम। पतित पावन सीता राम॥
  20. मंथरा ने कान भरे राम। पतित पावन सीता राम॥
  21. कैकेयी ने वर मांगे राम। पतित पावन सीता राम॥
  22. पितु आज्ञा सिर धरते राम। पतित पावन सीता राम॥
  23. वन को चले हैं श्री राम। पतित पावन सीता राम॥
  24. संग चले सिया लखन राम। पतित पावन सीता राम॥
  25. अवधवासी व्याकुल राम। पतित पावन सीता राम॥
  26. तमसा तीरे पहुँचे राम। पतित पावन सीता राम॥
  27. सुमन्त विदा किए श्री राम। पतित पावन सीता राम॥
  28. श्रृंगवेरपुर पहुँचे राम। पतित पावन सीता राम॥
  29. गुह निषाद से भेंटे राम। पतित पावन सीता राम॥
  30. केवट नाव मंगाए राम। पतित पावन सीता राम॥
  31. केवट पग पखारे राम। पतित पावन सीता राम॥
  32. गंगा पार उतरे श्री राम। पतित पावन सीता राम॥
  33. भारद्वाज आश्रम गए राम। पतित पावन सीता राम॥
  34. चित्रकूट में विराजे राम। पतित पावन सीता राम॥
  35. दशरथ त्यागे प्राण राम। पतित पावन सीता राम॥
  36. भरत मिले चित्रकूट में राम। पतित पावन सीता राम॥
  37. भरत को दीन्हीं चरण पादुका राम। पतित पावन सीता राम॥
  38. चरण पादुका शीश धरे भरत राम। पतित पावन सीता राम॥
  39. अत्रि मुनि के द्वारे राम। पतित पावन सीता राम॥
  40. अनुसूइया आशीष दें राम। पतित पावन सीता राम॥
  41. दण्डक वन में आए राम। पतित पावन सीता राम॥
  42. विराध का वध कीन्हा राम। पतित पावन सीता राम॥
  43. शरभंग मुनि को मुक्ति राम। पतित पावन सीता राम॥
  44. सुतीक्ष्ण मुनि से भेंटे राम। पतित पावन सीता राम॥
  45. अगस्त्य मुनि के पहुँचे राम। पतित पावन सीता राम॥
  46. पंचवटी में कुटिया राम। पतित पावन सीता राम॥
  47. शूर्पणखा की नासा काटी राम। पतित पावन सीता राम॥
  48. खर-दूषण का संहार राम। पतित पावन सीता राम॥
  49. मारीच कंचन मृग बना राम। पतित पावन सीता राम॥
  50. मृग के पीछे दौड़े राम। पतित पावन सीता राम॥
  51. रावण सीता हर ले गया राम। पतित पावन सीता राम॥
  52. जटायु ने युद्ध लड़ा भारी राम। पतित पावन सीता राम॥
  53. जटायु को परम गति दीनी राम। पतित पावन सीता राम॥
  54. वन-वन सीता खोजें राम। पतित पावन सीता राम॥
  55. कबंध राक्षस मारा राम। पतित पावन सीता राम॥
  56. शबरी के आश्रम पहुँचे राम। पतित पावन सीता राम॥
  57. प्रेम से जूठे बेर खाए राम। पतित पावन सीता राम॥
  58. पम्पा सरोवर आए राम। पतित पावन सीता राम॥
  59. विप्र रूप हनुमान मिले राम। पतित पावन सीता राम॥
  60. सुग्रीव से मित्रता कीन्ही राम। पतित पावन सीता राम॥
  61. बाली वध कर दिया श्री राम। पतित पावन सीता राम॥
  62. सुग्रीव को राज दिया श्री राम। पतित पावन सीता राम॥
  63. वानर सेना सीता खोजे राम। पतित पावन सीता राम॥
  64. हनुमान लांघे सागर राम। पतित पावन सीता राम॥
  65. सुरसा को पार किया श्री राम। पतित पावन सीता राम॥
  66. सिंहिका मारी हनुमान राम। पतित पावन सीता राम॥
  67. लंकिनी को पछाड़े हनुमान राम। पतित पावन सीता राम॥
  68. अशोक वाटिका खोजे हनुमान राम। पतित पावन सीता राम॥
  69. मुद्रिका डारी सिया आगे राम। पतित पावन सीता राम॥
  70. अक्षय कुमार को मारा राम। पतित पावन सीता राम॥
  71. मेघनाद ने बांधा ब्रह्मपाश राम। पतित पावन सीता राम॥
  72. सोने की लंका जलाई हनुमान राम। पतित पावन सीता राम॥
  73. चूड़ामणि ले आए हनुमान राम। पतित पावन सीता राम॥
  74. विभीषण शरण में आया राम। पतित पावन सीता राम॥
  75. सागर पर सेतु बांधा राम। पतित पावन सीता राम॥
  76. सेतुबंध रामेश्वर पूजे राम। पतित पावन सीता राम॥
  77. सेना सहित लंका पहुँचे राम। पतित पावन सीता राम॥
  78. अंगद शांति दूत बने राम। पतित पावन सीता राम॥
  79. अंगद पाँव जमाए सभा में राम। पतित पावन सीता राम॥
  80. राम रावण युद्ध छिड़ा भारी राम। पतित पावन सीता राम॥
  81. कुम्भकर्ण रणभूमि में आया राम। पतित पावन सीता राम॥
  82. कुम्भकर्ण को मारा श्री राम। पतित पावन सीता राम॥
  83. लक्ष्मण को शक्ति बाण लगा राम। पतित पावन सीता राम॥
  84. संजीवनी बूटी लाए हनुमान राम। पतित पावन सीता राम॥
  85. लक्ष्मण के प्राण बचाए राम। पतित पावन सीता राम॥
  86. मेघनाद का वध कीन्हा राम। पतित पावन सीता राम॥
  87. रावण रण में आया विकराल राम। पतित पावन सीता राम॥
  88. राम ने बाण संधान किया राम। पतित पावन सीता राम॥
  89. नाभि में अमृत सुखाया राम। पतित पावन सीता राम॥
  90. रावण का संहार किया श्री राम। पतित पावन सीता राम॥
  91. मंदोदरी विलाप करे भारी राम। पतित पावन सीता राम॥
  92. विभीषण को लंकापति कीन्हा राम। पतित पावन सीता राम॥
  93. सीता की अग्नि परीक्षा राम। पतित पावन सीता राम॥
  94. पुष्पक विमान सजाया श्री राम। पतित पावन सीता राम॥
  95. सखा सहित अवध लौटे राम। पतित पावन सीता राम॥
  96. नन्दिग्राम में भरत मिले राम। पतित पावन सीता राम॥
  97. माताओं के चरण छुए श्री राम। पतित पावन सीता राम॥
  98. अयोध्या में मंगल गावे राम। पतित पावन सीता राम॥
  99. वशिष्ठ मुनि तिलक लगावे राम। पतित पावन सीता राम॥
  100. सिंहासन विराजे श्री राम। पतित पावन सीता राम॥
  101. छत्र चंवर ढुरावे लखन राम। पतित पावन सीता राम॥
  102. राम राज्य की महिमा भारी राम। पतित पावन सीता राम॥
  103. दैहिक दैविक भौतिक तापा राम। पतित पावन सीता राम॥
  104. सब नर करहिं परस्पर प्रीति राम। पतित पावन सीता राम॥
  105. लव कुश गावें राम कथा राम। पतित पावन सीता राम॥
  106. वाल्मीकि रचित रामायण राम। पतित पावन सीता राम॥
  107. तुलसीदास गुण गावें राम। पतित पावन सीता राम॥
  108. जो जन गावे मनका पावन, भवसागर तर जावे राम॥ पतित पावन सीता राम॥

॥ समापन दोहा ॥
आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिय-पी की॥
सियावर रामचंद्र की जय! पवनसुत हनुमान की जय! उमापति महादेव की जय!

रामायण मनका 108 के नियमित पाठ के लाभ (Benefits)

  • समस्त बाधाओं एवं संकटों का निवारण: मनका 108 का पाठ करने से जीवन में आने वाली रुकावटें, ग्रह दोष और अज्ञात भय समाप्त होते हैं।
  • गृह कलह से मुक्ति एवं शांति: जिस घर में नियमित रूप से इसका सस्वर पाठ होता है, वहां कलह समाप्त होकर सुख, समृद्धि और आपसी प्रेम बढ़ता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: राम नाम की पवित्र ध्वनि वातावरण से नकारात्मक शक्तियों को दूर करती है और मानसिक एकाग्रता बढ़ाती है।
  • सम्पूर्ण रामायण का पुण्यफल: व्यस्त दिनचर्या में भी भक्त इस पाठ के द्वारा संपूर्ण रामायण का पुण्य और प्रभु श्री राम का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

रामायण मनका 108 पाठ करने की सही विधि

  1. प्रात:काल या संध्या के समय स्नान कर स्वच्छ एवं शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  2. घर के मंदिर में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें।
  3. प्रभु श्री राम, माता जानकी और हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  4. हाथ में जल लेकर संकल्प करें और मन को शांत रखते हुए प्रभु का ध्यान करें।
  5. पूर्ण श्रद्धा, एकाग्रता और स्पष्ट उच्चारण के साथ 108 मनकों का सस्वर पाठ करें।
  6. पाठ संपन्न होने के पश्चात श्री राम जी और हनुमान जी की आरती करें और भोग/प्रसाद अर्पित करें।

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