महात्मा गांधी के आंदोलन (Mahatma Gandhi Andolan List) PDF

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महात्मा गांधी के आंदोलन (Mahatma Gandhi Andolan List) - Summary

राष्ट्रपति महात्मा गांधी के आंदोलन आज भी भारत के दिलों में ज़िंदा हैं। महात्मा गांधी के आंदोलनों ने सत्य और अहिंसा के रास्ते से अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया। गांधी जी द्वारा चलाए गए कई अहम आंदोलन देशवासियों को स्वतंत्रता की राह दिखाने में मददगार साबित हुए। इस लेख में हम महात्मा गांधी के प्रमुख आंदलों को जानेंगे और साथ ही आप इस महत्वपूर्ण जानकारी को PDF में डाउनलोड भी कर सकते हैं।

महात्मा गांधी के आंदोलन: भारत की आजादी का सफर

महात्मा गांधी के आंदोलन कांग्रेस को आम जनता से जोड़ने में बहुत मददगार रहे। इन्होंने जनता में नई उम्मीद पैदा की कि स्वतंत्रता हासिल करना संभव है। गांधीजी ने सत्याग्रह और अहिंसा की ताकत से अंग्रेजों की सत्ताधारित नीतियों का विरोध किया। दक्षिण अफ्रीका में शुरू हुए उनके सत्याग्रह ने बाद में भारत में कई आंदोलन शुरू करवाए। ये महात्मा गांधी के आंदोलनों ने भारत के इतिहास में एक बड़ा बदलाव लाया।

महात्मा गांधी के प्रमुख आंदोलन (Mahatma Gandhi Andolan List) PDF डाउनलोड करें

अगर आप महात्मा गांधी के आंदलों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो इस लेख को पढ़ते रहें। आप महात्मा गांधी के आंदोलन की सूची और जानकारी वाला PDF भी डाउनलोड कर सकते हैं।

असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement)

जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद अप्रैल 1919 में पूरे देश में गुस्सा फैल गया था। अंग्रेजों के अत्याचार बढ़ने लगे। 1 अगस्त 1920 को महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन के तहत छात्रों ने स्कूल-कॉलेज जाना बंद कर दिया, मजदूर हड़ताल पर चले गए और वकील अदालतों में नहीं गए। गांव-शहर में असहयोग का असर तेजी से दिखने लगा।

असहयोग आंदोलन ने अंग्रेजों की सत्ता की नींव हिला दी। यह आंदोलन पूरी तरह अहिंसक था, लेकिन फरवरी 1922 में गोरखपुर के चौरी-चौरा में हुई हिंसा के कारण गांधीजी ने इसे वापस ले लिया। इस आंदोलन से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा मिली।

नमक सत्याग्रह (Salt Satyagraha) या दांडी मार्च

लगभग आठ साल बाद, महात्मा गांधी ने 12 मार्च 1930 से साबरमती आश्रम से दांडी तक पैदल मार्च शुरू किया। इसे दांडी मार्च या नमक सत्याग्रह कहा जाता है। अंग्रेज सरकार ने नमक पर कर लगाया था, जिसे गांधी जी ने गलत माना। इस आंदोलन का मकसद ब्रिटिश नमक कानून का उल्लंघन करना था।

24 दिन के इस मार्च में गांधी जी और उनके साथियों ने नमक कानून का विरोध करते हुए ब्रिटिश राज को चुनौती दी। इस दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया गया और अंततः 1931 में गांधी-इरविन समझौता हुआ। इस आंदोलन ने अंग्रेजों की नमक नीति को कमजोर कर दिया और महात्मा गांधी के आंदोलन को और मजबूत बनाया।

दलित आंदोलन (Dalit Movement)

8 मई 1933 को महात्मा गांधी ने छुआछूत के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। उन्होंने 21 दिन का उपवास किया और छुआछूत को खत्म करने की मांग की। इसके पहले 1932 में गांधी जी ने अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग की स्थापना की थी। उन्होंने दलितों को ‘हरिजन’ नाम दिया और ‘हरिजन’ नामक साप्ताहिक पत्र भी निकाला। यह महात्मा गांधी के आंदोलन का एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहलू था।

भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement)

9 अगस्त 1942 को गांधी जी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ शुरू किया। मुंबई की रैली में उन्होंने ‘करो या मरो’ का नारा दिया। यह आंदोलन ब्रिटिश सरकार के लिए सबसे बड़ा संकट था क्योंकि उस समय दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था। अंग्रेजों ने आंदोलनकारियों पर कड़ी कार्रवाई की और कई नेताओं को गिरफ्तार किया। यह आंदोलन भारत की स्वतंत्रता की दिशा में सबसे निर्णायक साबित हुआ और महात्मा गांधी के आंदोलन में सबसे बड़ा नाम बना। आज 2025 में भी इसका महत्व कम नहीं हुआ है।

चंपारण सत्याग्रह (Champaran Satyagraha)

1917 में बिहार के चंपारण जिले में महात्मा गांधी ने पहला सत्याग्रह शुरू किया। यह भारत का पहला नागरिक अवज्ञा आंदोलन था। इस आंदोलन में गांधी जी ने किसानों के लिए ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अहिंसक प्रतिरोध का रास्ता दिखाया। चंपारण सत्याग्रह ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। यह महात्मा गांधी के आंदोलनों की शुरुआत थी।

उपरोक्त महात्मा गांधी के आंदोलनों की पूरी जानकारी आप आसानी से PDF में डाउनलोड कर सकते हैं। यह PDF आपके अध्ययन और जानकारी के लिए बहुत मददगार होगा। आप इस PDF को डाउनलोड करके इन आंदलों के बारे में और गहराई से जान सकते हैं।

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