जय अम्बे गौरी आरती | Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics PDF Hindi

जय अम्बे गौरी आरती | Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics Hindi PDF Download

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Jai Ambe Gauri Aarti Hindi PDF

हैलो दोस्तों, आज हम आपके लिए लेकर आये हैं जय अम्बे गौरी आरती | Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics PDF हिन्दी भाषा में। अगर आप जय अम्बे गौरी आरती | Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics हिन्दी पीडीएफ़ डाउनलोड करना चाहते हैं तो आप बिल्कुल सही जगह आए हैं। इस लेख में हम आपको देंगे जय अम्बे गौरी आरती | Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics के बारे में सम्पूर्ण जानकारी और पीडीएफ़ का direct डाउनलोड लिंक।

नियमित रूप से अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती का जप करना माँ अम्बे को प्रसन्न करने और आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे अच्छा तरीका है । अम्बे माता आद्य शक्ति है जो सर्वोच्च शक्ति है । वह माँ दुर्गा की अभिव्यक्ति है और देवी पार्वती का दूसरा नाम है। ‘अंबे तू है जगदम्बे काली’ एक हिंदू भजन (आरती) है जो भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती देवी को समर्पित है ।

अम्बे माता आद्य शक्ति है जो सर्वोच्च शक्ति है। वह माँ दुर्गा की अभिव्यक्ति है और देवी पार्वती का दूसरा नाम है। इस आरती का गायन करने से देवी माँ शीघ्र प्रसन्न होती हैं। जय अम्बे गौरी आरती बहुत ही प्रचलित आरती है, जिसको देवी माता के विभिन्न पर्वों पर गाय जाता है। इस आरती को बहुत से लोग नियमित रूप से घर में गाते हैं।

जय अम्बे गौरी आरती PDF | Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics in Hindi

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी….. जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिव री।।
जय अम्बे गौरी,…।

मांग सिंदूर बिराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रबदन नीको।।
जय अम्बे गौरी,…।

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै।।
जय अम्बे गौरी,…।

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी। सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुःखहारी।।
जय अम्बे गौरी,…।

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत समज्योति।।
जय अम्बे गौरी,…।

शुम्भ निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती।।
जय अम्बे गौरी,…।

चण्ड-मुण्ड संहारे, शौणित बीज हरे। मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
जय अम्बे गौरी,…।

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।।
जय अम्बे गौरी,…।

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं, नृत्य करत भैरू। बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू।।
जय अम्बे गौरी,…।

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता।।
जय अम्बे गौरी,…।

भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्परधारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी।।
जय अम्बे गौरी,…।

श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति।।
जय अम्बे गौरी,…।

अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै। कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै।।
जय अम्बे गौरी,…।

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