Durga Saptashati Adhyay 1 to 13 - Summary
दुर्गा सप्तशती, जिसे चंडी पाठ या देवी महात्म्य भी कहा जाता है, देवी दुर्गा की महिमा और शक्ति का वर्णन करने वाला एक अत्यंत पवित्र ग्रंथ है। इसमें कुल 700 श्लोक हैं, जो 13 अध्यायों में विभाजित हैं। अध्याय 1 से 13 तक में देवी के विभिन्न रूपों, उनकी शक्तियों और असुरों के वध की कथाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन मिलता है। यह ग्रंथ मार्कंडेय पुराण का हिस्सा है और नवरात्रि तथा विशेष व्रत-उपवास के दिनों में इसका पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है।
दुर्गा सप्तशती के इन अध्यायों में मधु-कैटभ वध, महिषासुर मर्दिनी की कथा, शुंभ-निशुंभ वध सहित अनेक दिव्य लीलाओं का उल्लेख है। इसका पाठ करने से भक्त को न केवल आध्यात्मिक शांति और शक्ति प्राप्त होती है, बल्कि जीवन की बाधाएँ और कष्ट भी दूर होते हैं। श्रद्धा और भक्ति के साथ इन 13 अध्यायों का पाठ करने से माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और साधक का जीवन सुख, समृद्धि और संरक्षण से भर जाता है।
दुर्गा सप्तशती (देवी महात्म्य) के 13 अध्यायों की सूची
- मधु-कैटभ वध – भगवान विष्णु द्वारा मधु और कैटभ नामक असुरों का वध।
- महीषासुर का वध – देवी दुर्गा का महिषासुर का संहार।
- धूम्रलोचन वध – धूम्रलोचन असुर का वध।
- चण्ड और मुण्ड वध – देवी कालिका द्वारा चण्ड-मुण्ड का वध।
- रक्तबीज वध – रक्तबीज असुर का वध।
- शुम्भ वध – शुंभ असुर का वध।
- निशुम्भ वध – निशुंभ असुर का वध।
- देवताओं का स्तुति गीत – देवी की महिमा का गुणगान।
- महिषासुर वध का पुनः वर्णन – महिषासुर की कथा का विस्तार।
- देवताओं का स्तवन – देवताओं द्वारा देवी की स्तुति।
- देवी का आशीर्वाद – देवी द्वारा भक्तों और देवताओं को वरदान।
- फलश्रुति – दुर्गा सप्तशती पाठ के फल का वर्णन।
- देवी की स्तुति और उपसंहार – देवी की महिमा का अंतिम स्तवन और कथा का समापन।