दशरथ स्तुति शनि देव | Dashrath Stuti Shani Dev PDF in Sanskrit, Hindi

दशरथ स्तुति शनि देव | Dashrath Stuti Shani Dev Sanskrit, Hindi PDF Download using the direct download link

42 People Like This
REPORT THIS PDF ⚐

दशरथ स्तुति शनि देव | Dashrath Stuti Shani Dev PDF Download in Sanskrit, Hindi for free using the direct download link given at the bottom of this article.

दशरथ स्तुति शनि देव | Dashrath Stuti Shani Dev Sanskrit, Hindi

एक समय था जब पृथ्वी पर रघुवंशी साम्राज्य फैला हुआ था उस समय महाराज दशरथ राजा हुआ करते थे उस समय एक घटना हुई थी जिसमें शनि देव ने चंद्रमा को दंड देने के लिए ग्रहों का चक्कर लगाना शुरू कर दिया था तो जैसा-जैसे शनि देव धरती और उसपर पड़ने वाले छाया जो ग्रहों से आती है उनके ऊपर आ रहे थे तो ऋषि मुनियों ने राजा दशरथ को संकेत दिये की अगर शनि देव अगर पूरी तरह इन ग्रहों पर आ गए तो धरती पर बहुत ही बड़ा सूखा पड़ेगा जिससे अनगिनत जाने चली जाएंगी।

इस विनाश को रोकने के लिए शनि देव को रोकना बहुत जरूरी था इसलिए एक राजा होते हुए दशरथ जी ने शनि देव को रोकने की ठानी और वो उन्हे रोकने के लिए निकाल दिये जिसके बाद उनके और शनि देव के बीच युद्ध हुआ पर उसमें राजा दशरथ हार गए और शनि देव को नहीं रोक पाये इसलिए शनि देव को रोकने और उन्हे प्रसन्न करने के लिए एक स्तुति गाई। जिससे शनि देव प्रसन्न हो गए और यह बताया की जो भी मनुष्य इस शनि देव की दशरथ स्तुति का पाठ करेगा वह सभी कष्ट, संकटों से मुक्त हो जाएगा।

इसलिए अगर आप भी हर तरह के संकट से चाहे वह कुछ भी क्यूं ना हो इसके लिए शनि देव की दशरथ स्तुति हर शनिवार को उनके आगे गा सकते हैं।

दशरथ स्तुति शनि देव

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।

नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।

नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:।
नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते।।

नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम:।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।

नमस्ते सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तुते।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च।।

अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तुते।
नमो मन्दगते तुभ्यं निरिस्त्रणाय नमोऽस्तुते।।

तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:।।

ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज सूनवे।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्।।

देवासुरमनुष्याश्च सिद्घविद्याधरोरगा:।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशंयान्ति समूलत:।।

प्रसाद कुरु मे देव वाराहोऽहमुपागत।
एवं स्तुतस्तद सौरिग्र्रहराजो महाबल:।।

दशरथ स्तुति शनि देव हिन्दी अनुवाद

हे श्यामवर्णवाले, हे नील कण्ठ वाले।
कालाग्नि रूप वाले, हल्के शरीर वाले॥
स्वीकारो नमन मेरे, शनिदेव हम तुम्हारे।
सच्चे सुकर्म वाले हैं, मन से हो तुम हमारे॥
स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे॥
हे दाढ़ी-मूछों वाले, लम्बी जटायें पाले।
हे दीर्घ नेत्र वाले, शुष्कोदरा निराले॥
भय आकृति तुम्हारी, सब पापियों को मारे।
स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे॥

हे पुष्ट देहधारी, स्थूल-रोम वाले।
कोटर सुनेत्र वाले, हे बज्र देह वाले॥
तुम ही सुयश दिलाते, सौभाग्य के सितारे।
स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे॥

हे घोर रौद्र रूपा, भीषण कपालि भूपा।
हे नमन सर्वभक्षी बलिमुख शनी अनूपा ॥
हे भक्तों के सहारे, शनि! सब हवाले तेरे।
हैं पूज्य चरण तेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥

हे सूर्य-सुत तपस्वी, भास्कर के भय मनस्वी।
हे अधो दृष्टि वाले, हे विश्वमय यशस्वी॥
विश्वास श्रद्धा अर्पित सब कुछ तू ही निभाले।
स्वीकारो नमन मेरे। हे पूज्य देव मेरे॥

अतितेज खड्गधारी, हे मन्दगति सुप्यारी।
तप-दग्ध-देहधारी, नित योगरत अपारी॥
संकट विकट हटा दे, हे महातेज वाले।
स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥

नितप्रियसुधा में रत हो, अतृप्ति में निरत हो।
हो पूज्यतम जगत में, अत्यंत करुणा नत हो॥
हे ज्ञान नेत्र वाले, पावन प्रकाश वाले।
स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥

जिस पर प्रसन्न दृष्टि, वैभव सुयश की वृष्टि।
वह जग का राज्य पाये, सम्राट तक कहाये॥
उत्तम स्वभाव वाले, तुमसे तिमिर उजाले।
स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥

हो वक्र दृष्टि जिसपै, तत्क्षण विनष्ट होता।
मिट जाती राज्यसत्ता, हो के भिखारी रोता॥
डूबे न भक्त-नैय्या पतवार दे बचा ले।
स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥

हो मूलनाश उनका, दुर्बुद्धि होती जिन पर।
हो देव असुर मानव, हो सिद्ध या विद्याधर॥
देकर प्रसन्नता प्रभु अपने चरण लगा ले।
स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥

होकर प्रसन्न हे प्रभु! वरदान यही दीजै।
बजरंग भक्त गण को दुनिया में अभय कीजै॥
सारे ग्रहों के स्वामी अपना विरद बचाले।
स्वीकारो नमन मेरे। हैं पूज्य चरण तेरे॥

You can download Dashrath Stuti Shani Dev ki / Lyrics in good quality PDF or read online for free by clicking the link provided below.

Also, Read
Shani Vajrapanjara Kavacham PDF
Shri Shani Chalisa English
Shani Vajra Kavacham PDF in Telugu
Shani Dev Chalisa PDF in Hindi
Shani Dev Aarti Lyrics | शनि देवजी की आरती in Hindi

दशरथ स्तुति शनि देव | Dashrath Stuti Shani Dev PDF Download Link

REPORT THISIf the download link of दशरथ स्तुति शनि देव | Dashrath Stuti Shani Dev PDF is not working or you feel any other problem with it, please REPORT IT by selecting the appropriate action such as copyright material / promotion content / link is broken etc. If दशरथ स्तुति शनि देव | Dashrath Stuti Shani Dev is a copyright material we will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

RELATED PDF FILES

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *