Aaditya Hirdaya Stotra (आदित्य हृदय स्तोत्र संपूर्ण पाठ) - Summary
आदित्य हृदय स्तोत्र (Aaditya Hirdaya Stotra) श्री वाल्मिकी रामायण के युद्धकांड का एक सौ पांचवां सर्ग है। यह स्तोत्र भगवान राम को युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावी और अमोघ पाठ है। अगस्त्य ऋषि ने भगवान राम को यह बताने के बाद, जिन्होंने सूर्य के समान तेज़ पाने की इच्छुकता जताई, यह स्तोत्र सुनाया। यदि आप भी लड़ाई, मुकदमे या किसी कठिनाई में जीत पाना चाहते हैं, तो इस पाठ का जादुई प्रभाव आपके लिए लाभकारी होगा।
आदित्य हृदय स्तोत्र का महत्व
एक बार में इस स्तोत्र का 3x जप करना सबसे अच्छे परिणामों के लिए आदर्श माना जाता है। यदि अपने इस परिपाटी को विकसित कर लिया है, तो आप सोमवार से शनिवार तक एक बार इसका जाप कर सकते हैं, और रविवार को तीन बार। भगवान अगस्त्य ऋषि ने जो सूर्य के प्रति श्रद्धा प्रकट की थी, उन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।
अथ आदित्य हृदय स्तोत्रम हिन्दी अनुवाद सहित (Aaditya Hirdaya Stotra Sanskrit)
ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्।
रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्॥ 01
हिन्दी अनुवाद:- उधर श्रीरामचन्द्रजी युद्ध से थककर चिंता करते हुए रणभूमि में खड़े हुए थे। इतने में रावण भी युद्ध के लिए उनके सामने उपस्थित हो गया।
दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्।
उपागम्याब्रवीद्राममगस्त्यो भगवान् ऋषिः॥ 02
हिन्दी अनुवाद:-यह देख भगवान् अगस्त्य मुनि, जो देवताओं के साथ युद्ध देखने के लिए आये थे, श्रीराम के पास जाकर बोले।
आदित्य हृदय स्तोत्र (Aaditya Hirdaya Stotra) का पाठ एक अद्भुत साधना है। इसे यह सोचकर जपें कि इससे आपको विजय, खुशी और शांति मिलेगी। इस अद्भुत पाठ का PDF डाउनलोड करें और अपने जीवन में इसके लाभ का अनुभव करें। यह एक अमिट धरोहर है जो आपको न केवल किसी भी संकट में मदद करेगी, बल्कि आपको आध्यात्मिक आशीर्वाद भी प्रदान करेगी।
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