Bhaktamar Stotra – श्री भक्तामर स्तोत्र PDF in Sanskrit

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Bhaktamar Stotra – श्री भक्तामर स्तोत्र in Sanskrit

Bhaktamara Stotra is a famous Jain Sanskrit prayer. It was composed by Acharya Manatunga in seventh century. The name Bhaktamara comes from a combination of two Sanskrit names, “Bhakta” (Devotee) and “Amar” (Immortal).

Benefits of Chanting Bhaktamar Stotra

भक्तामर स्तोत्र के नियमित पढ़ने से कैंसर से मुक्ति मिल सकती है, खासतौर पर पद 45 के पढ़ने से। भक्तामर स्तोत्र में 48 श्लोक हैं। हर श्लोक में मंत्र शक्ति निहित है। इसके 48 के 48 श्लोकों में ‘म’, ‘न’, ‘त’ व ‘र’ ये 4 अक्षर पाए जाते हैं। भक्तामर स्तोत्र का प्रतिदिन आराधन कर धर्मध्यान कर जीवन में सुख-शांति का अनुभव करें।

भक्तामर स्तोत्र पढ़ने की विधि

भक्तामर स्तोत्र के पढ़ने का कोई एक निश्चित नियम नहीं है। भक्तामर स्तोत्र को किसी भी समय प्रात:, दोपहर, सायंकाल या रात में कभी भी पढ़ा जा सकता है। इसकी कोई समयसीमा निश्चित नहीं है, क्योंकि ये सिर्फ भक्ति प्रधान स्तोत्र हैं जिसमें भगवान की स्तुति है। धुन तथा समय का प्रभाव अलग-अलग होता है।

भक्तामर स्तोत्र का प्रसिद्ध तथा सर्वसिद्धिदायक महामंत्र है- ‘ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं अर्हं श्री वृषभनाथतीर्थंकराय् नम:।’

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